सपनों का उपहार

सपनों का उपहार

मेरी सुधियों में पावनता भर दे जाती हो प्यार प्रिये,
मेरे नयनों को सपनों का दे जाती हो उपहार प्रिये।

मैं पीड़ा का राजकुँवर हूँ तुम खुशियों की शहजादी हो,
मैं उपवन का एक भ्रमर हूँ औ तुम फूलों की वादी हो।
मैं हूँ पथ की तपती भूमी तुम राहों की शीतलता हो,
मैं लहरों की तेज धार हूँ तुम नदिया की कोमलता हो।

मेरे हर असहज भावों में जब भरती हो श्रृंगार प्रिये,
मेरे नयनों को सपनों का दे जाती हो उपहार प्रिये।

मैं शब्दों की पंखुरियों से मृदु कोरों को सहलाता हूँ,
न शिलालेख कहीं बन जाऊँ अपना अंतस दहलाता हूँ।
मेरा अपना क्या है जिसपर ये मेरा दिल अभिमान करे,
बस यही कामना है अधरों से हर गीतों का सम्मान करे।

अधरों से छू कर गीतों को जब देती हो आकार प्रिये,
मेरे नयनों को सपनों का दे जाती हो उपहार प्रिये।

दूर क्षितिज के प्रेमांगन में कुछ सपनों का आलिंगन है,
इस जीवन की गोधूली में और नहीं इक अनुबंधन है।
साँसों के महके सुवास में कुछ पुष्पित भाव हमारे हैं,
अंतर्मन में भाव सजे जो मैं कैसे कहूँ बिचारे हैं।

अंतर्मन को आलिंगन से जब करती हो मनुहार प्रिये,
मेरे नयनों को सपनों का दे जाती हो उपहार प्रिये।

©✍️अजय कुमार पाण्डेय
        हैदराबाद
        03 जुलाई, 2025

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