सूरज उगाएंगे चले जायेंगे

सूरज उगाएंगे चले जायेंगे 

​मोहब्बत की कसम खाकर निभाएँगे, चले जायेंगे
हम अपना फर्ज़ दुनिया में बताएँगे, चले जायेंगे।

​सजाकर ख़्वाब आँखों में, ये दिल को हम सजाएँगे
मगर इक रोज़ चुपके से रुलाएँगे, चले जायेंगे।

​तुम्हारी याद की खुशबू जो इन साँसों में महकेगी
इसी एहसास को दिल में बसाएँगे, चले जायेंगे।

​ज़माने की जफ़ाओं से हमें कोई गिला कब है
दुआएँ हम लबों पर बस सजाएँगे, चले जायेंगे।

​मिलेगा चैन जिस दर पर, उसी दर पर रुकेंगे हम
थकन अपनी वहीं जाकर मिटाएँगे, चले जायेंगे।

​अंधेरी रात के साये डराये देव हमें लेकिन
हम अपने ज़ख्म से सूरज उगाएँगे, चले जायेंगे।

✍️अजय कुमार पाण्डेय

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